शहरी विकास विभाग कार्यालय की स्थापना वर्ष 1969 में जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय परिसर में की गई थी। जिले में दो संस्थान कार्यरत हैं—शहरी विकास कार्यालय तथा जिला शहरी विकास एजेंसी (District Urban Development Agency — DUDA)। DUDA के अध्यक्ष ADC (अतिरिक्त उपायुक्त) मुख्यालय होते हैं तथा शहरी विकास अधिकारी (UDO) इसके सदस्य सचिव होते हैं।
शहरी विकास विभाग का मुख्य उद्देश्य सभी शहरी क्षेत्रों में आवश्यक शहरी आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा सतत विकास सुनिश्चित करना है। यह विभाग मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में विभिन्न शहरी आधारभूत संरचना विकास योजनाओं एवं गरीबी उन्मूलन योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन से संबंधित कार्य करता है।
मुख्य गतिविधियाँ (Main Activities)
- राज्य योजना के अंतर्गत योजनाएँ (State Plan Scheme)
(क) नगर संरक्षण योजना (Town Protection Scheme — TPS)
यह योजना जिला मुख्यालय, ADC मुख्यालय तथा मान्यता प्राप्त नगर परिषद क्षेत्रों में लागू की जाती है। इसके अंतर्गत कार्य ठेका एवं कार्यादेश के माध्यम से निष्पादित किए जाते हैं। उपलब्ध धनराशि के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित करके कार्यों का चयन किया जाता है।
(ख) शहरी आधारभूत संरचना विकास योजना (Urban Infrastructure Development Scheme — UIDS)
यह योजना सामान्यतः EAC, SDO (सिविल), ADC एवं DC के प्रशासनिक क्षेत्रों तथा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में लागू की जाती है।
TPS एवं UIDS योजनाओं के अंतर्गत मुख्य रूप से आधारभूत संरचना से संबंधित कार्य किए जाते हैं, जैसे—
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फुटपाथ का निर्माण।
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नालियों का निर्माण।
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सुरक्षा एवं प्रतिधारण दीवार (Retaining Wall) का निर्माण।
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प्रतीक्षालय (Waiting Shed) का निर्माण।
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सार्वजनिक शौचालय का निर्माण।
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सार्वजनिक कुओं का निर्माण।
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संपर्क सड़कों एवं अन्य आवश्यक सड़कों का निर्माण।
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शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) द्वारा जनकल्याण के लिए प्रस्तावित अन्य आवश्यक कार्य।
कार्यों के निष्पादन के दौरान उनकी जाँच एवं निरीक्षण किया जाता है तथा यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी कार्य निर्धारित मानकों एवं विनिर्देशों के अनुसार सफलतापूर्वक पूरे हों। कार्य पूर्ण होने के बाद आवश्यक पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificate), कार्यों की तस्वीरों सहित, कार्यपालक अभियंता, शहरी विकास विभाग, नागालैंड, कोहिमा को प्रस्तुत किए जाते हैं।
UIDS योजना के अंतर्गत लेखा-परीक्षण (Audit) के उद्देश्य से नकद बही (Cash Book) का संधारण किया जाता है। सामग्री की खरीद के लिए नकद रसीदें (Cash Memos) तथा मजदूरी के भुगतान हेतु मस्टर रोल (Muster Rolls) का उचित रखरखाव किया जाता है।
2. केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme — CSS)
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (National Urban Livelihood Mission — NULM) / जिला शहरी विकास एजेंसी (DUDA)
यह केंद्र प्रायोजित योजना वर्ष 2000–2001 में मोकोकचुंग नगर में शुरू की गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी गरीब परिवारों को संगठित करके उनके स्वयं के संस्थानों एवं समूहों का गठन करना है, ताकि गरीबी उन्मूलन के लिए प्रभावी और सतत व्यवस्था विकसित की जा सके।
इन गरीब समुदायों के संस्थान स्थानीय स्वशासन निकायों, सार्वजनिक सेवा प्रदाताओं, बैंकों, निजी क्षेत्र तथा अन्य संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करते हैं, जिससे शहरी गरीबों तक सामाजिक एवं आर्थिक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित की जा सके।
इस कार्यक्रम के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:
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स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए स्वरोजगार कार्यक्रम (Self Employment Programme — SEP)।
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व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए स्वरोजगार कार्यक्रम (SEP)।
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कौशल उन्नयन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम (Step-up / Skill Training)।
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रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए कार्यक्रम (Street Vendors)।
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शहरी बेघर लोगों के लिए आश्रय (Shelter for Urban Homeless — SUH)।
योजना के कार्यान्वयन से संबंधित गतिविधियाँ
योजना का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाले परिवारों का सर्वेक्षण किया गया।
1. क्षेत्र स्तरीय महासंघ (Area Level Federations — ALFs)
नगर के सभी वार्डों में क्षेत्र स्तरीय महासंघों का गठन किया गया। इनके सदस्यों को शामिल करके नगर स्तरीय महासंघ (City Level Federation) का गठन किया गया। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के गठन में सहायता के लिए संसाधन संगठनों (Resource Organisations — ROs) को भी शामिल किया गया।
2. स्वयं सहायता समूहों का गठन एवं सुदृढ़ीकरण
संसाधन संगठन (RO) तथा सामुदायिक आयोजक (Community Organisers — CO) स्वयं सहायता समूहों के गठन और प्रबंधन में सहायता करते हैं। इनके प्रमुख कार्य हैं—
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स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते खोलने एवं उनके संचालन में सहायता करना।
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समूहों की क्षमता का विकास करना।
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लेखा-पुस्तकों एवं अभिलेखों का उचित रखरखाव सुनिश्चित करना।
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बैंकों से ऋण एवं वित्तीय सुविधाओं के लिए संपर्क स्थापित करना।
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स्वयं सहायता समूहों के कार्यों एवं प्रदर्शन का मूल्यांकन करना।
3. व्यक्तिगत एवं समूह स्वरोजगार को बढ़ावा देना
शहरी गरीबों में से स्वरोजगार कार्यक्रम (SEP) के लिए पात्र व्यक्तिगत लाभार्थियों की पहचान की जाती है। समूहों एवं व्यक्तिगत लाभार्थियों को परियोजना रिपोर्ट तैयार करने तथा बैंकों से संपर्क स्थापित करने में सहायता दी जाती है, ताकि वे अपनी योग्यता, कौशल, प्रशिक्षण, रुचि एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वरोजगार गतिविधियाँ और सूक्ष्म उद्यम स्थापित कर सकें।
4. कौशल विकास एवं प्रशिक्षण (Step-up / Skill Training)
शहरी गरीबों को बाजार की माँग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे स्वरोजगार स्थापित कर सकें या वेतनभोगी रोजगार प्राप्त कर सकें।
5. रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए गतिविधियाँ (Street Vendors)
रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जाता है। उनके व्यवसाय के लिए अनुकूल योजनाएँ तैयार की जाती हैं तथा सड़क विक्रय के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है।
6. मासिक प्रतिवेदन (Monthly Report)
योजना के अंतर्गत की गई गतिविधियों, प्रगति एवं उपलब्धियों से संबंधित मासिक प्रतिवेदन तैयार करके मिशन निदेशक कार्यालय, कोहिमा को प्रस्तुत किया जाता है।